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कर्नल श्री हेम चंद्र सिंह

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से हैं और वर्तमान में JIM&WS, पहलगाम के प्राचार्य हैं। वे NDA और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज से शिक्षित हैं और 2004 में JAKLI रेजिमेंट से सेना में कमीशन्ड हुए। बाद में वे 1 पैरा एसएफ जैसे विशेष बल का हिस्सा बने। मणिपुर-नागालैंड में 38 असम राइफल्स का नेतृत्व कर कई पुरस्कार अर्जित किए। वे 30+ पर्वतारोहण अभियानों में भाग ले चुके हैं, जिनमें माउंट एवरेस्ट, नुन, कुन व किलिमंजारो शामिल हैं। स्कूबा डाइविंग, पैराशूटिंग व पर्वतारोहण में दक्ष कर्नल श्री सिंह राष्ट्रभक्ति व साहस के प्रतीक हैं।

Colonel Hem Chandra Singh

कर्नल श्री हेम चंद्र सिंह

प्राचार्य, जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS)
राष्ट्रीय सेवा, राष्ट्रवाद और रोमांच का प्रतीक

कर्नल श्री हेम चंद्र सिंह, जो वर्तमान में जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS), जम्मू-कश्मीर के आठवें प्राचार्य के रूप में सेवारत हैं, उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले से संबंध रखते हैं। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, पर्वतारोहण और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल है।

शैक्षणिक और सैन्य पृष्ठभूमि

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 फिरोजपुर और आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2000 में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में प्रवेश लिया और वहां से सफलतापूर्वक स्नातक किया। वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन से स्नातकोत्तर भी हैं।

सैन्य सेवा और विशेष बलों में भूमिका

सन् 2004 में उन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिला और उन्होंने जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (JAKLI) रेजिमेंट से अपनी सेवा की शुरुआत की। बाद में वे भारतीय सेना की प्रतिष्ठित विशेष बल इकाई – 1 पैरा स्पेशल फोर्सेज (1 PARA SF) के सदस्य बने, जहां उन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण अभियानों में नेतृत्व किया।

उत्तर-पूर्व में बहादुरी और नेतृत्व

मणिपुर और नागालैंड में 38 असम राइफल्स की कमान संभालते हुए, उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में वीरतापूर्वक योगदान दिया। उनकी बटालियन को GOC यूनिट प्रशंसा और मणिपुर राज्यपाल इकाई प्रशंसा से सम्मानित किया गया।

पर्वतारोहण, स्कीइंग और साहसिक अभियानों में विशेषज्ञता

वे जल, थल और आकाश तीनों क्षेत्रों में साहसिक गतिविधियों में पारंगत हैं। उन्होंने हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS), गुलमर्ग और नेपाल माउंटेनियरिंग स्कूल, जोमसोम से बेसिक एवं एडवांस पर्वतारोहण कोर्स पूर्ण किए, जहां उन्हें सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में भी सम्मान मिला।

प्रमुख अभियानों और उपलब्धियाँ

कर्नल श्री सिंह अब तक 30 से अधिक सफल पर्वतारोहण अभियानों का नेतृत्व कर चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • नॉर्थ पोल स्की अभियान

  • माउंट नुन और कुन (सबसे तेज़ चढ़ाई)

  • मेंटोक कांगड़ी, माउंट कोलाहोई, माउंट कत्सल

  • तोरांग-ला पास, नेपाल उनकी नेतृत्व क्षमता ने JIM&WS को Limca Book of Records में शामिल होने की दिशा में अग्रसर किया है।

अतिविशिष्ट साहसी कौशल

  • 100+ कॉम्बैट फ्री फॉल पैराशूट जंप्स

  • 400+ घंटे की स्कूबा डाइविंग, विशेष रूप से गहरे जल के अभियानों में विशेषज्ञता।

भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के वाहक

कर्नल श्री हेम चंद्र सिंह केवल सैन्य अधिकारी नहीं, बल्कि एक संस्कृति-प्रेमी राष्ट्रनायक हैं। वे मानते हैं कि "राष्ट्रवाद में संपूर्ण जीवन की ऊर्जा और दिशा निहित है। यदि हम राष्ट्र को समर्पित हैं, तो समाज और व्यक्ति स्वयं सशक्त होते चले जाते हैं।"

सोशल मीडिया पर सक्रियता

वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और सोशल मीडिया मंचों जैसे Facebook, Instagram, Twitter और LinkedIn पर अपनी साहसिक यात्राओं, सैन्य प्रेरणाओं और राष्ट्रीय विचारों को साझा करते हैं, जिससे हजारों युवा प्रेरित होते हैं।

कर्नल श्री हेम चंद्र सिंह का जीवन साहस, राष्ट्रसेवा, नेतृत्व और भारतीय गौरव का प्रतीक है। वे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं जो यह दर्शाते हैं कि यदि सेवा का भाव हो, तो जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन जाता है।

रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने माउंट एवरेस्ट व माउंट किलिमंजारो पर्वतारोहण अभियानों को किया सम्मानपूर्वक 'फ्लैग-इन'


  • साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली | तिथि: 17 जुलाई, 2025

भारत की साहसिक परंपरा और पर्वतारोहण में श्रेष्ठता का एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ा, जब रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने माउंट एवरेस्ट और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो पर विजय प्राप्त करने वाली टीमों को औपचारिक रूप से ‘फ्लैग-इन’ किया। यह आयोजन रक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में आयोजित किया गया।
माउंट एवरेस्ट अभियान – NIM की हीरक जयंती को समर्पित

इस अभियान का आयोजन नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया था। यह ऐतिहासिक पर्वतारोहण हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (HMI), दार्जिलिंग और जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS), पहलगाम के सहयोग से संपन्न हुआ।

🔹 अभियान नेतृत्व: कर्नल अंशुमान भदौरिया, प्राचार्य, NIM

🔹 उपनेता: कर्नल हेम चंद्र सिंह, प्राचार्य, JIM&WS

🔹 अन्य सदस्यों में शामिल थे:

  • श्री राकेश सिंह राणा

  • सूबेदार बहादुर पाहन

  • हवलदार राजेन्द्र मुखिया

  • नायक थुपस्तान त्सेवांग

  • श्री पासंग तेनजिंग शेर्पा

टीम ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) को 23 मई 2025 को खुम्बु घाटी के रास्ते सफलतापूर्वक फतह किया। इस साहसिक मिशन का उद्देश्य केवल चोटी पर चढ़ना नहीं था, बल्कि प्रशिक्षकों को एवरेस्ट का प्रत्यक्ष अनुभव देकर भावी पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रेरित करना था।

माउंट किलिमंजारो अभियान – दिव्यांगजनों की अडिग भावना को सलाम

इस अनूठे अभियान का संचालन प्राचार्य, HMI दार्जिलिंग, ग्रुप कैप्टन जय किशन के नेतृत्व में हुआ।🔹 टीम के सदस्य:

  • कैप्टन श्रुति

  • सूबेदार महेन्द्र कुमार यादव

  • श्री पावेल शर्मा

  • सुश्री सुलक्षणा तमांग

  • और विशेष रूप से 91% घुटने के ऊपर विकलांग दिव्यांगजन श्री उदय कुमार, जिनका साहस पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया।

08 अगस्त 2024 को, टीम ने माउंट किलिमंजारो की चोटी पर भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। इसके पश्चात, उन्होंने दरस सलाम (तंजानिया) के पास हिंद महासागर में 35 फीट गहराई में तिरंगा फहराया तथा अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली बार दिव्यांगजनों की तांडव स्काइडाइव करवा कर ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की।

यह अभियान थल, जल और नभ – तीनों आयामों में भारतीय पर्वतारोहण कौशल, आत्मबल और राष्ट्रीय गौरव का एक अद्वितीय प्रतीक बन गया।

रक्षा सचिव का प्रेरणादायक संबोधन

रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने इन दोनों अभियानों में भाग लेने वाली टीमों के अटूट साहस, आत्मबल और देशभक्ति की भावना को नमन करते हुए कहा:

"ये अभियान केवल पर्वतारोहण नहीं थे, बल्कि ये भारत की अभियान क्षमता, नेतृत्व और साहसिक खेलों में विश्व अग्रणी भूमिका का प्रदर्शन हैं। इन अभियानों ने न केवल शिखरों को छुआ, बल्कि युवाओं को नई ऊँचाइयों के सपने देखने की प्रेरणा दी है।"

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि

"प्रधानमंत्री का सदैव यही संदेश रहा है – युवाओं को आत्मनिर्भर, सक्षम और निडर बनाना ही आत्मनिर्भर भारत का आधार है।"

उन्होंने रक्षा मंत्रालय की चार पर्वतारोहण संस्थाओं – HMI, NIM, JIM&WS, और NIMAS को इस दृष्टि के प्रमुख स्तंभ बताया।


🇮🇳 भारत का संदेश विश्व को:
"कोई सीमा, कोई पर्वत, कोई महासागर हमारी क्षमता के आगे बाधा नहीं – जहां साहस है, वहां भारत है।"

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