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श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

नीति, नवाचार और निष्ठा के प्रतीक...
जब बात आधुनिक भारत के सक्षम, सशक्त और संवेदनशील नेतृत्व की होती है, तब श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। विचारशीलता, तकनीकी समझ, प्रशासनिक क्षमता और सामाजिक सरोकारों से परिपूर्ण यह व्यक्तित्व आज की राजनीति को नई दिशा दे रहा है। चाहे जल संरक्षण हो, ग्रामीण उत्थान, या सांस्कृतिक धरोहरों का संवर्धन – शेखावत जी का हर कदम राष्ट्रहित में उठाया गया एक मजबूत पड़ाव सिद्ध होता है।

Gajendra Singh Shekhawat

सांसद श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

(भारतीय जनता पार्टी , लोकसभा सदस्य- जोधपुर, राजस्थान | केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, भारत सरकार।)

श्रेणी

विवरण

पूरा नाम

श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत "गज्जू बन्ना"

जन्म स्थान

जैसलमेर, राजस्थान

जन्म तिथि

3 अक्तूबर 1967

पिता का नाम

श्री शंकर सिंह शेखावत

माता का नाम

श्रीमती मोहन कंवर

वैवाहिक स्थिति

विवाहित (विवाह: 24 नवंबर 1993)

जीवनसाथी का नाम

श्रीमती नौनंद कंवर

संतान

सुश्री सुहासिनी शेखावत, श्री अर्जुन सिंह शेखावत, सुश्री सुरंगमा शेखावत

ईमेल आईडी

मोबाइल | टेलीफोन नंबर

जोधपुर: 0291 2512772

नई दिल्ली: 011-23017125 (R), 23017121, 23017126 (0)

सोशल मीडिया

व्यवसाय/पेशा

कृषक, समाजसेवी, राजनीतिज्ञ

शैक्षणिक योग्यता

एम.ए., एम.फिल. (दर्शनशास्त्र), जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर

स्थायी पता

34-ए अजीत कॉलोनी, जोधपुर, राजस्थान 342006

वर्तमान पता

12 अकबर रोड, नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली 110011

राजनीतिक दल

सांसद निर्वाचन क्षेत्र

जोधपुर, राजस्थान

सरकारी और राजनीतिक पद

तीसरी बार सांसद निर्वाचित, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री नियुक्त।

"गज्जू बन्ना"- नीति, नवाचार और निष्ठा के प्रतीक

प्रारंभिक जीवन, बाल्यकाल और पालन-पोषण

राजस्थान के सीमांत जिले जैसलमेर की शौर्यभूमि में 3 अक्तूबर 1967 को जन्मे गजेन्द्र सिंह शेखावत एक साधारण किसान परिवार से आते हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व असाधारण प्रेरणा का स्रोत है। उनके पिता श्री शंकर सिंह शेखावत राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी थे। घर में अनुशासन, सेवा और आत्मसम्मान की भावना बचपन से ही भरी गई थी।

बाल्यकाल में गजेन्द्र सिंह ने सीमांत जीवन की कठिनाइयों को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया। जल संकट, सीमावर्ती जीवन की असुरक्षा और संसाधनों की कमी जैसी परिस्थितियों ने उनके व्यक्तित्व में सहिष्णुता, संवेदनशीलता और सेवा भाव को दृढ़ किया। वे शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी, स्वभाव से विनम्र और समाज के प्रति सजग रहे।

शिक्षा और छात्र जीवन की भूमिका

गजेन्द्र सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा जैसलमेर में पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए जोधपुर आए। उन्होंने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर (M.A.) और एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की। छात्र जीवन के दौरान ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ गए और 1992 में विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। यह उनके नेतृत्व का पहला सार्वजनिक मंच था, जहाँ उन्होंने विचारशीलता, संगठनात्मक शक्ति और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।

राजनीतिक जीवन का प्रारंभ

छात्र राजनीति में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान भाजपा की कार्यकारिणी के सदस्य बने। ग्रामीण भारत, सीमावर्ती क्षेत्र और किसानों के हितों के लिए वे एक बुलंद आवाज बन गए।

सांसद से मंत्री तक का सफर

🔹 2014 – जोधपुर लोकसभा सीट से ऐतिहासिक मतों से जीत।

🔹 2017 – कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री नियुक्त।

🔹 2019 – केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।

🔹 2024 – तीसरी बार सांसद निर्वाचित, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री नियुक्त।

उनकी प्रशासनिक शैली में योजनाओं का डिजिटल ट्रैकिंग, डेटा एनालिसिस और परिणाम-आधारित नीति निर्माण प्रमुख रहा है। जल जीवन मिशन को गांव-गांव पहुंचाने और नारी शक्ति से जल शक्ति तक की पहलें इसी दृष्टिकोण की देन हैं।

  • जल जीवन मिशन – 75% ग्रामीण भारत को नल जल सेवा से जोड़ना।

  • अटल भूजल योजना, नमामि गंगे, कैच द रेन – जल प्रबंधन को जनांदोलन बनाना।

  • संस्कृति मंत्रालय – हेरिटेज कानूनों को सरल करना, ASI की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना।

  • पर्यटन मंत्रालय – भारत को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना।

  • सीमा जन कल्याण समिति – सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा व सामाजिक जागरूकता की अलख जगाना।

कृषि से संस्कृति तक: जननेता गजेन्द्र सिंह शेखावत की यात्रा

"एक ऐसे नेतृत्व की प्रेरक गाथा, जिसने किसान की पीड़ा से लेकर राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना तक को अपनी सेवा से जोड़ा। सीमांत जैसलमेर से निकलकर जोधपुर के जनप्रिय सांसद और भारत सरकार में जल शक्ति, कृषि, संस्कृति और पर्यटन जैसे महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभालने वाले शेखावत जी ने योजनाओं को ज़मीन पर उतारा और करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया। उनका नेतृत्व आंकड़ों पर नहीं, अनुभवों और लोगों के विश्वास पर टिका है। वे डिजिटल युग के प्रभावी जननेता हैं, जो परंपरा में rooted और तकनीक में updated हैं। उनका जीवन संदेश देता है – जब सेवा में संकल्प और नेतृत्व में दृष्टि हो, तो कोई भी पृष्ठभूमि राष्ट्र निर्माण की ऊँचाइयों को छू सकती है।

कृषि एवं किसान कल्याण में योगदान

शेखावत की जड़ें कृषि और ग्रामीण समाज से जुड़ी रही हैं। सितम्बर 2017 में उन्हें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। इस भूमिका में उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया। बतौर किसान मोर्चा महासचिव, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत किया और किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचाने में योगदान दिया।

उन्होंने सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रखते हुए भाजपा संसदीय दल की बैठक में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पावरपॉइंट प्रस्तुति दी, जिसने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया। इससे उनकी प्रशासनिक पकड़ और डेटा-चालित दृष्टिकोण का अंदाज़ा मिलता है। किसान कल्याण के क्षेत्र में शेखावत का मानना रहा कि नई तकनीक, मार्केट लिंकेज और सरकार की पहल के संगम से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है।

जल संरक्षण और जल शक्ति मंत्रालय

2019 में नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें जल शक्ति मंत्रालय सौंपा गया। यह मंत्रालय देश में पानी से जुड़े सभी संसाधनों और योजनाओं का समन्वय करता है। जल शक्ति मंत्री रहते हुए शेखावत ने जल जीवन मिशन जैसी क्रांतिकारी योजना को आगे बढ़ाया, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार को नल से साफ पेयजल पहुंचाना था। उनके नेतृत्व में कुछ ही वर्षों में ग्रामीण भारत के 75% घरों तक पाइप द्वारा पीने का पानी पहुँचाया जा चुका था।

उन्होंने जल शक्ति अभियान और कैच द रेन जैसी पहल शुरू की, जिसमें व्यापक जनभागीदारी के जरिये जल संरक्षण को एक जनआंदोलन बनाया गया। महिलाओं की भूमिका को आगे रखते हुए "नारी शक्ति से जल शक्ति" थीम पर अभियान चलाया गया।

उनके कार्यकाल में नमामि गंगे कार्यक्रम को गति मिली और अटल भूजल योजना जैसे भूजल संरक्षण प्रयासों को नई दिशा दी गई। उनका स्पष्ट मानना था: “जल संकट को हम अवसर में बदल सकते हैं।”

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय का दायित्व

2024 में तीसरी बार सांसद बनने के बाद उन्हें संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय सौंपा गया। इस भूमिका में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प लिया। उनका कहना था कि संस्कृति और पर्यटन का समन्वय एक विकसित भारत के निर्माण में सहायक हो सकता है।

शेखावत मानते हैं कि भारत की सॉफ्ट पावर इसकी सांस्कृतिक विविधता है। वे धरोहरों के संरक्षण में आधुनिक तकनीक का समावेश और आमजन की भागीदारी पर ज़ोर देते हैं। विरासत स्थलों के चारों ओर की नीति को सरल बनाया गया, ताकि सांस्कृतिक विकास में अवरोध न आए।

पर्यटन को उन्होंने रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत स्रोत माना। उनका उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल MICE डेस्टिनेशन बनाना और आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन व सांस्कृतिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर प्रमुखता देना रहा है।

जनसंपर्क व सामाजिक पहल

राजनीति में आने से पहले शेखावत सीमा जन कल्याण समिति से जुड़े रहे। इस मंच के माध्यम से उन्होंने राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा, सुरक्षा और नागरिक भागीदारी की "दूसरी रक्षा पंक्ति" तैयार की। उनके प्रयासों से भारत-पाक सीमा पर 40 स्कूल और 4 छात्रावास बने।

अपने संसदीय क्षेत्र जोधपुर में वे अत्यंत लोकप्रिय हैं। जनसुनवाई की सहजता, हर वर्ग से संवाद और जनता से जुड़ाव ने उन्हें जनता के दिलों में "गज्जू भैया" जैसा आत्मीय नाम दिलाया।

सोशल मीडिया पर प्रभाव और नवाचार

गजेन्द्र सिंह शेखावत डिजिटल माध्यमों पर बेहद सक्रिय हैं। Quora पर वे सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले भारतीय राजनेता हैं। वे लोगों के प्रश्नों के सटीक और विनम्र जवाब देते हैं, जिनमें सरकार की योजनाओं की जानकारी सहजता से समाहित होती है।

Facebook, X (पूर्व में Twitter) और Instagram जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वे न केवल योजनाओं और नीतियों की जानकारी साझा करते हैं, बल्कि आम लोगों की शिकायतों का तुरंत संज्ञान लेकर त्वरित समाधान के लिए भी जाने जाते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी उपस्थिति, संवाद और समाधान का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। डिजिटल जुड़ाव के माध्यम से वे लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी और सहभागी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।



गजेन्द्र सिंह शेखावत के व्यक्तित्व में परंपरा और प्रगतिशीलता का अद्भुत संतुलन है। राजस्थान की सोंधी मिट्टी से निकला यह नेता आधुनिक भारत की राजनीति में एक ऐसा नाम है जो विकास, संवाद और संवेदना के प्रतीक के रूप में उभरता है।
अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुँच। वे मानते हैं कि लोकतंत्र में सेवा का सबसे ऊँचा स्थान वह है जो सादगी, पारदर्शिता और आत्मीयता से भरा हो। उनका जीवन दर्शन हर युवा नेता के लिए एक आदर्श है कि राजनीति जनसेवा का माध्यम हो सकती है – यदि उसमें जनसमर्पण, दूरदृष्टि और संकल्प हो।


"भाजपा गंगा जैसी है, संविधान गीता नहीं है – ज़रूरत हो तो राष्ट्रहित में संशोधन होना चाहिए" : केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, जोधपुर | 20अप्रैल, 2024

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के जोधपुर लोकसभा प्रत्याशी श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने एक साक्षात्कार में कहा कि भाजपा गंगा जैसी है – जिसमें हर छोटी-बड़ी धारा समाहित होती है। भ्रष्टाचार से जुड़े नेताओं के पार्टी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि गंगा सबको अपने में समाहित कर लेती है, और जो समाहित नहीं हो पाते, वे सूर्य की तपिश में वाष्पित हो जाते हैं।

उन्होंने यह भी दोहराया कि भाजपा संविधान को बदलना नहीं चाहती, बल्कि संविधान में बदलाव की प्रक्रिया तो स्वयं डॉ. अंबेडकर ने भी तय की थी और कांग्रेस के कार्यकाल में भी कई बार संशोधन हुए हैं।

"संविधान कोई गीता नहीं है, जिसमें श्लोक स्थायी होते हैं। संविधान में संशोधन का प्रावधान इसलिए है ताकि ज़रूरत पड़ने पर राष्ट्रहित में बदलाव किया जा सके।"

उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि मोदी सरकार संविधान को मिटाने पर तुली है।

"जब धारा 370 हटाई गई, तब संविधान में संशोधन हुआ – लेकिन वो भारत के हित में था। जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण देने की बात आई, तब भी संविधान बदला गया। ऐसा इसलिए क्योंकि देश का हित सर्वोपरि है।"

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय भी संविधान में कई संशोधन किए गए — क्या तब कोई सवाल उठा?


“छोटी धाराओं से मिलकर बनी है भाजपा, गंगा की तरह सबको समाहित करती है”

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कुछ नेताओं के भाजपा में आने पर सवाल पूछा गया तो शेखावत ने कहा:

"जनसंघ की शुरुआत सिर्फ पाँच नेताओं से हुई थी और आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है। इतने वर्षों में जो लोग भाजपा से जुड़े, क्या वो राजनीति में स्वतंत्र थे? वो कहीं न कहीं से तो आए होंगे। भाजपा एक परिवार है, जिसमें कई धाराएँ मिलकर संगम बनाती हैं।"

उन्होंने कांग्रेस द्वारा भाजपा को ‘वॉशिंग मशीन’ कहने के जवाब में कहा:

"गंगा में स्नान करने से पाप धुलते हैं, यह हिंदू मान्यता है। भाजपा गंगा की तरह है, जो सबको समाहित करती है, शुद्ध करती है।"
संविधान संशोधन पर स्पष्ट विचार

शेखावत ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने इस बात की व्यवस्था संविधान में की थी कि यदि समय की माँग हो और देश का भला हो, तो संविधान में बदलाव किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा:

"अगर देश की ज़रूरत हो, तो संविधान में बदलाव क्यों न हो? हर चीज़ की प्रक्रिया संविधान में तय है और वह प्रक्रिया ही लोकतंत्र की खूबसूरती है।"

अल्पसंख्यकों के नाम पर झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश

उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, तब एक भय फैलाया गया था कि अगर वे जीत गए, तो अल्पसंख्यकों को देश छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने सवाल किया:

"क्या किसी को भारत छोड़ने को कहा गया? क्या किसी को डराया गया? नहीं। देश में सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर चल रही है।"

राजस्थान में पानी की राजनीति पर तीखा प्रहार

चुनावी जनसभाओं में शेखावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत पर तीखे हमले करते नज़र आ रहे हैं।

"मैं जादूगर नहीं हूँ, लेकिन आपकी पानी की समस्या का समाधान ज़रूर करूंगा।"

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हर ज़रूरी संसाधन राजस्थान को दिए, लेकिन कांग्रेस सरकार ने हर घर नल से जल योजना को रोक दिया क्योंकि उन्हें डर था कि अगर हर घर तक पानी पहुंच गया, तो कांग्रेस अगले 50 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी।

"यह कांग्रेस का जनता के साथ किया गया पाप है। लोगों को प्यासा रख कर उन्होंने राजनीति की रोटी सेंकी।"
ज़मीन पर बदलाव का दावा, पोस्टरों से जनता को संदेश

जोधपुर जिले में शेखावत के बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगे हैं, जिनमें उन्हें वादों को पूरा करने वाला नेता बताया गया है। उनके हर भाषण में जल संकट, राम मंदिर और आतंकवाद पर मोदी सरकार की सख्ती प्रमुख मुद्दा रहते हैं।

विपक्ष के हमलों पर जवाब

कांग्रेस प्रत्याशी करण सिंह ने उन पर हमला बोलते हुए कहा:

"आप कैबिनेट मंत्री हैं और आपने अपने ही संसदीय क्षेत्र में पानी की समस्या हल नहीं की – ऐसी स्थिति में आपको खुद इस्तीफा दे देना चाहिए था।"

इसके जवाब में शेखावत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लिफ्ट कैनाल परियोजना के तीसरे चरण का काम समय पर शुरू नहीं किया, जिससे आज दर्जनों गाँवों में पीने के पानी की किल्लत है।


"मैं दुर्घटनावश नेता बना, भाजपा में नेतृत्व तय करता है भूमिका"

अपने राजनीतिक सफर पर बात करते हुए शेखावत ने कहा:

"मैं राजनीति में संयोगवश आया हूँ। भाजपा में यह संगठन तय करता है कि कौन कहाँ काम करेगा। यही पार्टी की खूबसूरती है – यहाँ एक सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री बन सकता है।"

राजस्थान भाजपा में अंदरूनी कलह पर उन्होंने संक्षेप में कहा:

"राजनीति में प्रतिस्पर्धा सामान्य है। मतभेद थे, हैं और रहेंगे। यही लोकतंत्र है।

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