
जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी
जनरल श्री उपेन्द्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वर्तमान में भारतीय थलसेना के 30वें सेनाध्यक्ष हैं। 1 जुलाई 1964 को मध्य प्रदेश में जन्मे जनरल द्विवेदी ने सैनिक स्कूल रीवा, एनडीए और आईएमए से शिक्षा प्राप्त की। 1984 में जम्मू-कश्मीर राइफल्स की 18वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त कर सेना में प्रवेश किया। उन्होंने उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर महत्वपूर्ण कमानें संभाली हैं। उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी, उपसेनाध्यक्ष और डीजी इन्फेंट्री जैसे अहम पदों पर रहते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, अत्याधुनिक तकनीकों और सैनिक कल्याण को बढ़ावा दिया। योगाभ्यास में पारंगत जनरल द्विवेदी को देश सेवा हेतु परम विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।
General Upendra Dwivedi
जनरल उपेन्द्र द्विवेदी: भारत की थलसेना के 30वें सेनाध्यक्ष
जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम, एक वरिष्ठ चार सितारा जनरल हैं, जो वर्तमान में भारतीय थलसेना के 30वें सेनाध्यक्ष (Chief of the Army Staff) के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 30 जून 2024 को जनरल मनोज पांडे के सेवानिवृत्त होने के पश्चात इस पद का कार्यभार संभाला। इससे पहले वे भारतीय सेना के उपसेनाध्यक्ष (Vice Chief of the Army Staff) और उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ रहे हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जनरल द्विवेदी का जन्म 1 जुलाई 1964 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने सन् 1973 में सैनिक स्कूल रीवा (म.प्र.) में दाखिला लिया और 1981 में वहां से उत्तीर्ण हुए। वे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून के छात्र रहे। उन्होंने अमेरिका स्थित United States Army War College से भी अध्ययन किया, जहां उन्हें ‘Distinguished Fellow’ की उपाधि प्राप्त हुई। उनके पास डिफेंस एवं मैनेजमेंट स्टडीज़ में एम.फिल., स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ और मिलिट्री साइंस में दो मास्टर्स डिग्रियाँ हैं।
सैन्य करियर की शुरुआत
15 दिसंबर 1984 को उन्होंने जम्मू-कश्मीर राइफल्स की 18वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने ऑपरेशन रक्षक के अंतर्गत कश्मीर घाटी के चौकिबाल और राजस्थान के रेगिस्तानों मे ं बटालियन की कमान संभाली। मणिपुर में ऑपरेशन राइनो के तहत असम राइफल्स की एक सेक्टर की कमान संभाली। उनके सैन्य अनुभवों में उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी थिएटर का संतुलित संचालन सम्मिलित है।
विशेष भूमिकाएं और उपलब्धियां
दो बार विदेशी तैनातियाँ: सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNOSOM-II) और सेशेल्स में सैन्य सलाहकार के रूप में।
उच्च सैन्य शिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षक और डायरेक्टिंग स्टाफ के रू प में सेवा।
असम राइफल्स में IGAR (East) और सेक्टर कमांडर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने भारत-म्यांमार सीमा प्रबंधन पर पहला समग्र दस्तावेज तैयार किया।
डायरेक्टर जनरल इन्फेंट्री रहते हुए उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए हथियारों की तेज़ पूंजीगत खरीद सुनिश्चित की।
उपसेनाध्यक्ष (सूचना प्रणाली एवं समन्वय) के रूप में तकनीकी उन्नयन, स्वचालन और नई प्रौद्योगिकियों के समावेश को बल दिया।
उत्तरी कमान का नेतृत्व
1 फरवरी 2022 को उन्होंने उत्तरी कमान के कमांडर के रूप में कार्यभार संभाला। यहां उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग, बिग डेटा जैसे अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी उपकरणों को सेना में सम्मिलित किया। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों के साथ तालमेल बनाकर बुनियादी ढांचे के विकास में भी योगदान दिया।
सेनाध्यक्ष के रूप में योगदान
11 जून 2024 को भारत सरकार द्वारा उन्हें सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 30 जून 2024 को उन्होंने 30वें सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला। उन्होंने भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की दिशा में रणनीतिक नेतृत्व प्रदान किया।
व्यक्तिगत जीवन
जनरल उपेन्द्र द्विवेदी की पत्नी श्रीमती सुनीता द्विवेदी विज्ञान स्नातक हैं और एक कुशल गृहिणी हैं। वे भोपाल के ‘आरुषि’ संस्थान से जुड़ी रही हैं, जो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समर्पित है। दंपत्ति की दो बेटियाँ हैं, जो स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के साथ कार्यरत हैं। जनरल द्विवेदी योग के भी कुशल साधक हैं।
सम्मान और पुरस्कार
परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) – 2024
अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) – 2021
तीन बार जीओसी-इन-सी कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित
एनडीए, आईएमए एवं फिजिकल ट्रेनिंग कोर्स में उत ्कृष्ट प्रदर्शन हेतु ब्लू एवं गोल्ड मेडल प्राप्त
जनरल उपेन्द्र द्विवेदी न केवल एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि दूरदृष्टा रणनीतिकार और तकनीकी नवाचारों के समर्थक भी हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता, समर्पण, राष्ट्रप्रेम और सैनिकों के कल्याण हेतु किए गए कार्य भारतीय सेना के लिए प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन हर युवा अधिकारी और राष्ट्रसेवक के लिए अनुकरणीय है।
