
श्री ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1991 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो वर्तमान में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने असम पुलिस के महानिदेशक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में IG और SPG जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए आतंकवाद, उग्रवाद, भ्रष्टाचार और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना किया है। उनकी नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और रणनीतिक सोच ने उन्हें भारत की आंतरिक सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बना दिया है।
Gyanendra Pratap Singh
"आंतरिक सुरक्षा के सजग प्रहरी – IPS ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह"
ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, जिन्हें जी. पी. सिंह के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 8 नवंबर 1967 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ में हुई, जहाँ से उन्होंने बी.एससी और एम.एससी की डिग्री प्राप्त की। वे बचपन से ही मेधावी और अनुशासित छात्र रहे।
उनकी पत्नी डॉ. अनामिका सिंह वनस्पति विज्ञान में पीएच.डी हैं। उनकी दो पुत्रियाँ हैं – बड़ी बेटी ऐश्वर्या सिंह भारतीय पुलिस सेवा में अधिकारी हैं और दिल्ली में एसीपी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि छोटी बेटी आराधिता सि ंह राज्यसभा सचिवालय में सेवारत हैं।
आईपीएस सेवा की शुरुआत
ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने 1992 में प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद असम-मेघालय कैडर में अपनी सेवा शुरू की। असम के सोणितपुर, नलबाड़ी और रंगिया जिलों में ASP और SP के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को सशक्त किया।
विशेष सुरक्षा समूह (SPG) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
वर्ष 2002 में वे विशेष सुरक्षा समूह (SPG) में नियुक्त किए गए, जहाँ उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद 2013 से 2019 तक वे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में महानिरीक्षक (IG) के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने कई बड़े आतंकी हमलों की जाँच की, जिनमें उरी, पठानकोट और पुलवामा जैसे हमले शामिल हैं।
आतंकवाद से जुड़े वित्त पोषण तंत्र को तोड़ने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के विरुद्ध मजबूत कानूनी कार्रवाई में उनकी अग्रणी भूमिका रही।
असम पुलिस में नेतृत्व
2019 में वे पुनः असम लौटे और विशेष महानिदेशक (Law & Order) के रूप में नियुक्त किए गए। उन्होंने असम में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्वक संभाला।
उन्होंने भ्रष्टाचार उन्मूलन ब्यूरो, गैंडे शिकार विरोधी बल, और साइबर अपराध इकाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया।
उनके नेतृत्व में वर्ष 2022 में असम में गैंडे के अवैध शिकार की एक भी घटना नहीं हुई – यह अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
2023 में, उन्हें असम राज्य का पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य में उग्रवाद विरोधी अभियानों को बल दिया, पुलिस बलों का आधुनिकीकरण किया और आमजन के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता को बढ़ावा दिया।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक
18 जनवरी 2025 को ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया। उन्होंने 30 जनवरी 2025 को पदभार ग्रहण किया।
CRPF भारत का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जो देश के आंतरिक सुरक्षा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर में विशेष अभियान संचालन के लिए जाना जाता है।
जी. पी. सिंह की नियुक्ति को इस बात की पुष्टि माना गया कि उनके पास जटिल आंतरिक सुरक्षा स्थितियों में रणनीतिक नेतृत्व देने की अद्वितीय क्षमता है।
उनका कार्यकाल 30 नवंबर 2027 तक निर्धारित है या फिर सरकार द्वारा आगे के आदेश तक।
सेवा विशेषताएँ व सम्मान
अत्यधिक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दायित्वों के सफल संचालन के लिए उन्हें समय-समय पर उच्च स्तरीय प्रशंसा, पदक और सराहना प्राप्त हुई है।
उनका नेतृत्व बल और नीति के समन्वय का उदाहरण बन चुका है।
ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह एक अनुशासित, सख्त लेकिन संवेदनशील प्रशासक हैं, जिनका अनुभव क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लगभग हर आयाम को स्पर्श करता है। असम में उग्रवाद से लड़ने से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी में आतंकवाद से टक्कर लेने और अब देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी CRPF को नेतृत्व देने तक उनकी यात्रा भारतीय सुरक्षा ढांचे का गौरव है।
