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मेजर श्री सोमनाथ शर्मा

भारत माता के पहले परमवीर
मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे जिन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे एक ऐसे वीर सैनिक थे, जिन्होंने केवल 24 वर्ष की आयु में अपने अद्वितीय साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति से अमर शौर्य की गाथा लिखी।

उनकी शहादत 1947 के भारत-पाक युद्ध के समय श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा करते हुए हुई, और यह लड़ाई भारत की एकता और अखंडता के लिए निर्णायक सिद्ध हुई।

Major Shri Somnath Sharma

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
  • जन्म: 31 जनवरी 1923, दध गाँव, कांगड़ा, पंजाब प्रांत (अब हिमाचल प्रदेश)

  • पिता: मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा (स्वयं एक सैन्य अधिकारी)

  • शिक्षा:

    • शेरवुड कॉलेज, नैनीताल

    • प्रिन्स ऑफ वेल्स रॉयल मिलिट्री कॉलेज, देहरादून

    • रॉयल मिलिट्री अकादमी, सैंडहर्स्ट (ब्रिटेन)

🕉️ बचपन से ही वे भगवद गीता से प्रेरित थे — अर्जुन की तरह युद्धभूमि में धर्म का पालन करने के लिए सदैव तैयार।

सैन्य जीवन की शुरुआत
  • सेवा में प्रवेश: 22 फरवरी 1942 को ब्रिटिश भारतीय सेना में कमीशन

  • रेजिमेंट: 19वीं हैदराबाद रेजिमेंट (बाद में 4 कुमाऊं रेजिमेंट)

  • द्वितीय विश्व युद्ध: बर्मा के अराकान अभियान में हिस्सा लिया, जहां उनकी वीरता के लिए उन्हें "Mentioned in Dispatches" सम्मान मिला।

बड़गाम की लड़ाई (3 नवम्बर 1947)
  • पाकिस्तान समर्थित कबायलियों ने कश्मीर पर आक्रमण किया।

  • श्रीनगर हवाई अड्डा भारत के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।

  • मेजर शर्मा के बाएं हाथ में प्लास्टर था, फिर भी उन्होंने अपनी D कंपनी के साथ मोर्चा संभाला।

  • दुश्मन की संख्या 500 से अधिक थी, जबकि भारतीय सैनिक मात्र 120।

  • गोलीबारी में उनका शरीर विस्फोट से क्षत-विक्षत हो गया, लेकिन अंतिम समय तक वे सैनिकों का उत्साह बढ़ाते रहे।

अंतिम शब्द:

"The enemy is only 50 yards from us. We are heavily outnumbered. We are under devastating fire. But I shall not withdraw an inch and will fight to the last man and last round." – Maj. Somnath Sharma

परम वीर चक्र से सम्मानित
  • मेजर शर्मा को मरणोपरांत भारत का पहला परमवीर चक्र प्रदान किया गया।

  • यह सम्मान उन्हें 3 नवम्बर 1947 की वीरता के लिए मिला।

  • गौरवपूर्ण तथ्य: उनकी भाभी सावित्री बाई खानोलकर ने परमवीर चक्र का डिज़ाइन तैयार किया था।

विरासत और स्मृतियाँ
  • MT Major Somnath Sharma, PVC: भारत सरकार के नौवहन निगम द्वारा उनके नाम पर तेलवाहक जहाज।

  • टीवी श्रृंखला ‘परमवीर चक्र’ (1988): उनके जीवन पर आधारित पहला एपिसोड जिसमें अभिनेता फारूक शेख ने उनका किरदार निभाया।

  • सेना में स्मृति: हर सैनिक को मेजर शर्मा की वीरता की मिसाल दी जाती है।

मेजर शर्मा की विशेषताएँ

गुण

विवरण

🎖️ अद्वितीय साहस

दुश्मन से 10 गुना अधिक संख्या के बावजूद डटे रहे

🙏 आध्यात्मिक विचार

भगवद्गीता से प्रेरित, कर्मपथ पर अडिग

🪔 राष्ट्रप्रेम

घायल अवस्था में भी युद्ध में भाग लिया

🧡 प्रेरणा

आज भी हर भारतीय सैनिक के आदर्श

सीखने योग्य बातें
  1. कर्तव्यनिष्ठा – जब उनका हाथ टूटा था, फिर भी युद्धभूमि में जाने का आग्रह किया।

  2. अडिग संकल्प – “एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा” – यह उनका अंतिम संदेश था।

  3. नैतिक बल – केवल हथियार से नहीं, बल्कि आत्मबल से भी युद्ध लड़ा।

"रक्त से सींचे इस राष्ट्र की माटी की सुगंध में आज भी मेजर शर्मा जैसे बलिदानियों का स्वाभिमान बसता है। वे एक योद्धा ही नहीं, एक विचार थे — कि जब देश पुकारे, तो प्राणों की आहुति देना भी गर्व है।"

🇮🇳 "यदि मैं आज रणभूमि में शहीद हो जाऊं, तो अपने आप को धन्य समझूंगा कि मैंने अपने देश की सेवा में जीवन अर्पित किया।" — मेजर सोमनाथ शर्मा
संबंधित विषय
  • परमवीर चक्र विजेताओं की सूची

  • 1947 का भारत-पाक युद्ध

  • कुमाऊं रेजिमेंट का इतिहास

  • भगवद गीता में युद्ध धर्म


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