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श्री नरेंद्र मोदी

भारतवर्ष के वर्तमान प्रधानमंत्री, न केवल एक कुशल प्रशासक हैं, बल्कि एक ऐसे वैश्विक नेता के रूप में उभरे हैं जो 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को अपने हर कदम में आत्मसात किए हुए हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर, उन्होंने असाधारण नेतृत्व का परिचय दिया है।
21वीं सदी में जब भारत आत्मनिर्भरता, तकनीक, संस्कृति और वैश्विक कूटनीति के नए युग में प्रवेश कर रहा है, तब मोदी जी उस परिवर्तनशील हिन्दुस्थान के प्रमुख सूत्रधार हैं। उनकी दूरदृष्टि, नीतिगत निर्णय, राष्ट्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाली योजनाएं और भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने की प्रतिबद्धता उन्हें एक युगद्रष्टा नेता बनाती है।
वे केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से निकला हुआ वह स्वप्न हैं, जो आज विश्व जनसमुदाय की आशा बन चुका है।

Narendra Modi

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

(भारतीय जनता पार्टी , लोकसभा सदस्य- वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

श्रेणी

विवरण

पूरा नाम

श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी

जन्म स्थान

वडनगर, मेहसाणा जिला, गुजरात (तत्कालीन बॉम्बे राज्य)

जन्म तिथि

17 सितम्बर 1950

पिता का नाम

स्व. दामोदरदास मूलचंद मोदी

माता का नाम

श्रीमती हीराबा (स्वर्गवास - 2022)

ईमेल आईडी

मोबाइल

+918975462014

टेलीफोन नंबर

निवास- 011 23018939,

कार्यालय-23012312, 23017660

फैक्स: 011-23010233, 23016857

सोशल मीडिया

व्यवसाय/पेशा

राजनीति, लेखक, समाजसेवा

शैक्षणिक योग्यता

  • बी.ए. (राजनीति विज्ञान) - दिल्ली विश्वविद्यालय

  • एम.ए. (राजनीति विज्ञान) - गुजरात विश्वविद्यालय

स्थायी पता

सी-1 सोमेश्वर टेनमेंट, रानीप, अहमदाबाद, गुजरात -382480

वर्तमान पता

7 लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली - 110011

राजनीतिक दल

सांसद निर्वाचन क्षेत्र

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

सरकारी और राजनीतिक पद

  • 9 जून 2024 से वर्तमान तक: भारत के प्रधानमंत्री |

    साथ ही निम्नलिखित मंत्रालयों एवं विभागों के प्रभारी: कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय | परमाणु ऊर्जा विभाग | अंतरिक्ष विभाग | सभी महत्वपूर्ण नीति-संबंधी विषय | अन्य सभी विभाग जिन्हें किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किया गया है |

  • जून 2024: 18वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित

  • 30 मई 2019 से 9 जून 2024 तक: भारत के प्रधानमंत्री

  • साथ ही प्रभारी: कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय | परमाणु ऊर्जा विभाग | अंतरिक्ष विभाग | सभी प्रमुख नीतिगत विषय | अन्य सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं थे

  • मई 2019: 17वीं लोकसभा के लिए पुनः निर्वाचित (दूसरा कार्यकाल)

  • 26 मई 2014 से 25 मई 2019: भारत के प्रधानमंत्री

  • मई 2014: 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित

  • 2002 – 2014: गुजरात विधानसभा के सदस्य (चार बार निर्वाचित)

  • 2001 – 2014: गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री

एक युगद्रष्टा राष्ट्रनायक की गाथा

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के एक छोटे-से नगर वडनगर (मेहसाणा ज़िला) में हुआ। उनका परिवार अत्यंत सामान्य सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंधित था। पिता श्री दामोदरदास मूलचंद मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे और माँ श्रीमती हीराबेन एक धार्मिक, परिश्रमी और त्यागमयी महिला थीं। नरेंद्र मोदी ने बचपन से ही परिवार की आर्थिक सहायता के लिए अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचना प्रारंभ किया। यह कार्य एक बच्चे के रूप में उनके मन में गहराई से आत्मनिर्भरता, संघर्ष और परिश्रम के मूल्य को बिठाने वाला था।

छोटे नरेंद्र की रुचि बचपन से ही राष्ट्र, समाज और आध्यात्मिक चिंतन में रही। वे नाटकों, भाषणों और विचार मंचों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनकी शिक्षा गुजरात विश्वविद्यालय और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स की उपाधि के साथ पूर्ण हुई। शिक्षा के दौरान वे निरंतर स्व-अनुशासन, अध्ययन और विचारशीलता में रत रहे।

संघ संस्कार और राष्ट्रसेवा की नींव

नरेंद्र मोदी ने बहुत कम आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में भाग लेना आरंभ किया। उन्होंने स्वयंसेवक के रूप में संघ की कठोर दिनचर्या, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को आत्मसात किया। संघ के प्रशिक्षण ने उनके जीवन में एक सुदृढ़ विचारधारा का विकास किया – जिसमें भारत की संस्कृति, सभ्यता, गौरवशाली इतिहास और समरस समाज की परिकल्पना प्रमुख रही। उन्होंने "सेवा ही संगठन है" के मंत्र को जीवन में उतारा।

संघ में उन्होंने छोटे-छोटे कार्यों से लेकर संगठनात्मक रणनीतियों तक में योगदान दिया। इसी दौरान वे राजनीति और जनसंपर्क के उन तरीकों से अवगत हुए जो बाद में उन्हें एक महान जननेता बनाने वाले थे।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में विकास पुरुष की पहचान (2001–2014)

वर्ष 2001 में जब गुजरात विनाशकारी भूकंप की त्रासदी से जूझ रहा था, तभी नरेंद्र मोदी को राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक थी क्योंकि वे तब तक जनप्रतिनिधि नहीं थे। लेकिन उनकी प्रशासनिक दूरदृष्टि और तेज निर्णयशक्ति ने गुजरात के पुनर्निर्माण को एक नया आयाम दिया।

उन्होंने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ जैसे वैश्विक निवेश सम्मेलनों की शुरुआत की, जिससे गुजरात को एक निवेश-अनुकूल, औद्योगिक और नवाचार केंद्र के रूप में पहचान मिली। बिजली उत्पादन, सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था, जल प्रबंधन, कृषि नीति और शिक्षा के क्षेत्रों में उन्होंने व्यापक सुधार किए। विशेष रूप से ‘24x7 बिजली’ और 'कृषि विकास दर' को दो अंकों तक ले जाना उनकी योजनाओं की सफलता का प्रमाण है।

मोदी मॉडल ऑफ गवर्नेंस ने भारत के भीतर ही नहीं, विदेशों में भी सुर्खियाँ बटोरीं। उनके नेतृत्व को "गुड गवर्नेंस", "प्रो-पीपल पॉलिसी" और "नॉन-कॉरप्ट एडमिनिस्ट्रेशन" का पर्याय माना जाने लगा। गुजरात का प्रशासनिक अनुभव उन्हें प्रधानमंत्री बनने की ओर ले जाने वाला निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ।

भारत के प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र निर्माण का स्वर्णिम काल

पहला कार्यकाल (2014–2019): विकास का जनांदोलन

2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी ने "अच्छे दिन" और "सबका साथ, सबका विकास" के नारे के साथ ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त किया। स्वतंत्र भारत में पहली बार एक पूर्ण बहुमत वाली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। इस कार्यकाल में उन्होंने कई ऐतिहासिक योजनाएं लागू कीं:

  • प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खुले जिससे वित्तीय समावेशन की क्रांति हुई।

  • स्वच्छ भारत मिशन ने खुले में शौच से मुक्ति को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया।

  • उज्ज्वला योजना ने लाखों महिलाओं को धुएँ से मुक्ति दिलाई।

  • मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियान भारत को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध हुए।

  • 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक ने यह दिखाया कि भारत अब आतंकी हमलों को मूक दृष्टा बनकर नहीं देखेगा।

दूसरा कार्यकाल (2019–2024): निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण

2019 में एक बार फिर नरेंद्र मोदी को पहले से भी अधिक बहुमत के साथ जनादेश मिला। इस बार उन्होंने कुछ अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय लिए:

  • अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त किया।

  • राम मंदिर का निर्माण आरंभ हुआ, जिससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं पूरी हुईं।

  • तीन तलाक पर प्रतिबंध, मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की ऐतिहासिक पहल थी।

  • कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने त्वरित लॉकडाउन, गरीबों को राशन, वैक्सीन निर्माण और वितरण जैसी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित कीं।

  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थान दिलाने की शुरुआत की गई।

तीसरा कार्यकाल (2024–वर्तमान): विश्वगुरु भारत की दिशा में

2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतिहास रचा — स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे नेता बने जिन्होंने तीन बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। उनका वर्तमान कार्यकाल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

  • वे हरित ऊर्जा, डिजिटल समावेशन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण नवाचार, और वैश्विक नेतृत्व को लेकर बड़ी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं।

  • G-20 की भारत अध्यक्षता, IMEC परियोजना, AI पर नीति निर्माण, और विश्व जनसंख्या मंच पर भारत का नेतृत्व — यह सब भारत की सशक्त भूमिका को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बुलंद आवाज

नरेंद्र मोदी की कूटनीति ने भारत को एक आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

  • उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देकर भारतीय भाषाओं का गौरव बढ़ाया।

  • इंटरनेशनल योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकार कराकर विश्वभर में योग को भारत की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दिलाई।

  • Howdy Modi, Namaste Trump, Vibrant India-Vibrant Diaspora जैसे आयोजनों में लाखों NRI भारतीयों से सीधा जुड़ाव स्थापित किया।

नीतियों की आधारशिला – ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’

प्रधानमंत्री मोदी का यह नारा केवल एक वाक्य नहीं बल्कि शासन की समावेशी, समर्पित और सामूहिक सहभागिता आधारित नीति का आधार है। उन्होंने इस सिद्धांत के अंतर्गत न केवल योजनाओं का निर्माण किया, बल्कि उनके स्थानीय क्रियान्वयन, जन-सहभागिता और जवाबदेही को भी मजबूत किया।

सम्मान, पुरस्कार और वैश्विक मान्यता

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को उनके असाधारण नेतृत्व, वैश्विक प्रभाव और लोकसेवा की प्रतिबद्धता के लिए विश्वभर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों एवं सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

विदेशी सर्वोच्च नागरिक सम्मान

पुरस्कार

देश

वर्ष

ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअज़ीज़

सऊदी अरब

2016

स्टेट ऑर्डर ऑफ ग़ाज़ी अमानुल्ला खान

अफगानिस्तान

2016

ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन

फिलिस्तीन

2018

निशान इज़्ज़ुद्दीन का विशिष्ट नियम आदेश

मालदीव्स

2019

ऑर्डर ऑफ ज़ायेद

संयुक्त अरब अमीरात

2019

किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रिनेसां

बहरीन

2019

लीजन ऑफ मेरिट

संयुक्त राज्य अमेरिका

2020

ऑर्डर ऑफ फिजी

फिजी

2023

ऑर्डर ऑफ लोगोहू

पापुआ न्यू गिनी

2023

ऑर्डर ऑफ द नाइल

मिस्र

2023

लीजन ऑफ ऑनर

फ्रांस

2023

ऑर्डर ऑफ ऑनर

ग्रीस

2023

ऑर्डर ऑफ द ड्रैगन किंग

भूटान

2024

ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू

रूस

2024

ग्रैंड कमांडर, ऑर्डर ऑफ द नाइजर

नाइजीरिया

2024

डोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनर

डोमिनिका

2024

ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस

गुयाना

2024

ऑर्डर ऑफ मुबारक द ग्रेट

कुवैत

2024

ऑर्डर ऑफ फ्रीडम

बारबाडोस

2025

ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशियन

मॉरिशस

2025

श्रीलंका मित्र विभूषण

श्रीलंका

2025

ग्रैंड क्रॉस, ऑर्डर ऑफ मकारियोस III

साइप्रस

2025

ऑफिसर, ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना

घाना

2025

ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो

त्रिनिदाद और टोबैगो

2025

ग्रैंड कॉलर, ऑर्डर ऑफ द साउदर्न क्रॉस

ब्राज़ील

2025

ऑर्डर ऑफ द वेलविट्शिया

नामीबिया

2025

अंतरराष्ट्रीय एवं वैश्विक नेतृत्व सम्मान

  • चैम्पियंस ऑफ द अर्थ (संयुक्त राष्ट्र, 2018) — पर्यावरण नेतृत्व में अग्रणी कार्य के लिए

  • सियोल पीस प्राइज़ (दक्षिण कोरिया, 2018) — वैश्विक शांति और सहयोग हेतु योगदान

  • ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड (2019) — स्वच्छ भारत अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु

  • ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरनमेंट लीडरशिप अवॉर्ड (2021) — ऊर्जा एवं पर्यावरण में नवाचार

  • डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर ग्लोबल पीस अवॉर्ड (2024) — शांति और समानता हेतु प्रतिबद्धता

प्रतिष्ठित नगर व सामाजिक सम्मान

  • ह्यूस्टन सिटी की 'Key to the City' (2019) — 50,000+ जनसमूह की ऐतिहासिक सभा में

  • अबुजा (नाइजीरिया) की 'Key to the City' (2024) — भारत-नाइजीरिया मैत्री के सम्मान में

वैश्विक मीडिया और प्रतिष्ठानों द्वारा मान्यता

  • Time Magazine:

    • कवर पर चित्रण: 2012, 2014, 2015

    • 100 प्रभावशाली लोगों की सूची: 2014, 2015, 2017, 2020, 2021

  • Forbes Magazine:

    • विश्व के सबसे शक्तिशाली लोग: #15 (2014), #9 (2015, 2016, 2018)

  • Bloomberg Markets:

    • सबसे प्रभावशाली व्यक्ति: #13 (2015)

  • Fortune Magazine:

    • World's Greatest Leaders: #5 (2015)

  • Gallup International:

    • विश्व के शीर्ष नेता: #3 (2017)

  • Time:

    • इंटरनेट पर सबसे प्रभावशाली लोग: 2015

  • सोशल मीडिया रिकॉर्ड:

    • 2018 में ट्विटर पर तीसरे, और इंस्टाग्राम व फेसबुक पर पहले स्थान पर सबसे अधिक फॉलो किए गए विश्व नेता

सांस्कृतिक और वैश्विक पहचान

  • मैडम तुसाद (लंदन, 2016) में प्रधानमंत्री मोदी की मोम की प्रतिमा स्थापित की गई — यह भारत के वैश्विक नेतृत्व की प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले ये सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि भारत की नीति, नेतृत्व, संस्कृति और जनभागीदारी की वैश्विक स्वीकृति हैं। यह प्रत्येक भारतीय युवा को यह प्रेरणा देते हैं कि जब दृष्टि व्यापक हो, सेवा निष्कलंक हो और संकल्प अडिग हो — तो कोई भी सपना असंभव नहीं। ये सम्मान एक युगपुरुष के कर्मों की गूँज हैं, जो अब विश्व इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं।

डिजिटल युग का संवादकर्ता

नरेंद्र मोदी ने तकनीक के युग में सीधे जनता से संवाद स्थापित करने की परंपरा को जन्म दिया।

  • मन की बात जैसे रेडियो कार्यक्रम ने हर महीने करोड़ों भारतीयों से जुड़ने का माध्यम बनाया।

  • नमो ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Twitter, Facebook, Instagram, YouTube) पर उनकी सक्रियता अभूतपूर्व है।


प्रेरणास्त्रोत, कर्मयोगी और युगद्रष्टा

श्री नरेंद्र मोदी केवल एक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक आंदोलन और भारत के जागरण का प्रतीक हैं। उनका जीवन संघर्ष, सेवा, और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। वे यह प्रमाणित करते हैं कि एक सामान्य नागरिक भी अपने परिश्रम और राष्ट्रप्रेम से सर्वोच्च शिखर तक पहुँच सकता है।

उनका लक्ष्य स्पष्ट है – विकसित, सुरक्षित, समृद्ध, और सांस्कृतिक भारत का निर्माण। और उनके नेतृत्व में भारत निरंतर इस मार्ग पर अग्रसर है।

यदि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: आधुनिक युग के ‘भगीरथ’- योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

🗓️ 17 सितंबर 2024

भूमिका: नया विश्व, नई भारत नेतृत्व भूमिका

21वीं सदी में भारत विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में एक केंद्रीय शक्ति के रूप में उभर चुका है। आज वैश्विक राजनीति बहुध्रुवीय (Multipolar) हो चुकी है और कोई भी अंतरराष्ट्रीय समूह भारत की भागीदारी के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। चाहे बात आपदा राहत की हो या वैश्विक नीतिगत सहमति बनाने की—विश्व भारत की ओर देखता है।

पिछले एक दशक में भारत को इस वैश्विक मंच पर अग्रणी स्थान दिलाने वाले दूरदर्शी नेता हैं हमारे देश के प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी। उनकी सोच, नीति और संकल्प ने भारत को केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि विश्व की निर्णायक शक्ति बना दिया है।

राजनयिक समाधानकर्ता के रूप में मोदी जी की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी न केवल भारत के मामलों में बल्कि वैश्विक संकटों के समाधान में भी एक विश्वसनीय शक्ति के रूप में उभरे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया की जटिलताएँ—हर बार भारत ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई और समाधान के लिए संवाद का मंच बना। आज यह विश्वास न केवल भारतीय जनमानस में बल्कि विश्व शक्तियों के बीच भी गहराई से स्थापित हो गया है कि "अगर प्रधानमंत्री मोदी नेतृत्व में हैं, तो असंभव भी संभव है।"

आधुनिक भगीरथ: राष्ट्र को विकास की धारा में प्रवाहित करने वाले नेता

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में ‘भगीरथ’ वह ऋषि हैं, जिन्होंने तप और संकल्प से गंगा को पृथ्वी पर अवतरित किया। उसी प्रकार, आज भारत के लिए नरेंद्र मोदी आधुनिक युग के भगीरथ के रूप में देखे जा रहे हैं। वे न केवल समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं, बल्कि जनआकांक्षाओं को पूरा करने का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

चाहे दूरदराज़ खेत में काम करती महिला किसान हो, टेक्नोलॉजी स्टार्टअप में कार्यरत युवा उद्यमी हो, सीमाओं की रक्षा कर रहा सैनिक हो या विदेश में रह रहा कोई प्रवासी भारतीय—हर वर्ग का नागरिक मोदी जी की नीतियों, दृष्टिकोण और निर्णयों पर अडिग विश्वास करता है। यही विश्वास प्रधानमंत्री को निर्णायक कदम उठाने की शक्ति देता है।

धारा 370 और 35A: जो कभी असंभव था, अब इतिहास है

एक समय था जब धारा 370 और 35A को अछूता विषय माना जाता था—एक राजनीतिक विस्फोट, जिससे कोई भी सरकार टकराना नहीं चाहती थी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिथक को तोड़ा। उनके नेतृत्व में यह संभव हुआ कि "एक राष्ट्र, एक संविधान, एक झंडा" का सपना जम्मू-कश्मीर में साकार हो।

आज वहां अशांति की जगह विकास की बयार बह रही है। नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, चिनाब रेलवे ब्रिज, जो एफिल टॉवर से भी ऊँचा है, जैसी इंजीनियरिंग की अद्भुत मिसालें बन रही हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों में एक नया कश्मीर, प्रधानमंत्री के राष्ट्रवाद, सुशासन और विकास की भावना को अपनाकर आगे बढ़ रहा है।

भारत में सांस्कृतिक नवजागरण का नेतृत्व

500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में श्रीराम लल्ला की भव्य प्राण प्रतिष्ठा और काशी विश्वनाथ मंदिर का गौरवपूर्ण पुनर्निर्माण—इन दोनों ही सांस्कृतिक कार्यों ने भारत की आत्मा को नवजीवन दिया है। यह केवल धार्मिक घटनाएँ नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं की पूर्ति हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सांस्कृतिक जड़ों को पुनः जागृत कर, उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने आधुनिकता के साथ परंपरा को जोड़ने का कार्य किया है।

जातिवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार से मुक्ति का युग

2014 के बाद भारत ने उन राजनीतिक ताक़तों से मुक्ति पाई जो जातिवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति पर टिकी थीं। अब सरकारी योजनाएं पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ ज़मीन तक पहुँच रही हैं। यह बदलाव केवल नीतिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति का परिवर्तन है।

‘सबका साथ, सबका विकास’ से ‘अंत्योदय से सर्वोदय’ तक

प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली एक नई कार्यसंस्कृति को जन्म देती है जिसमें ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ न केवल नारा है, बल्कि नीति और व्यवहार का आदर्श है। उनके केंद्र में अंत्योदय—यानि सबसे अंतिम व्यक्ति—का कल्याण है।

किसानों को पहली बार राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनाया गया है। फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य, उर्वरक सब्सिडी, यंत्रीकृत खेती—इन सबका लाभ बिना भेदभाव के किसानों तक पहुँच रहा है। अब कृषि सिर्फ जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है।

तीसरे कार्यकाल की शुरुआत: नव विश्वास, नव युग

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के शुरुआती तीन महीनों में दो ऐतिहासिक निर्णय लिए:

  1. 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान योजना का लाभ देना,

  2. ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ का प्रारंभ।

ये निर्णय केवल योजनाएं नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और गरिमा के युग की शुरुआत हैं।

JAM Trinity: जनधन, आधार, मोबाइल की शक्ति

जनधन योजना, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति ने उस लीकेज तंत्र को समाप्त किया, जिसमें गरीबों तक लाभ पहुँचने में भ्रष्टाचार बाधा बनता था। अब हर योजना का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में जाता है

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था—“हर रुपया अपने अधिकतम प्रभाव के साथ खर्च होना चाहिए।” और यही ‘Direct Benefit Transfer’ मॉडल है, जिससे सिर्फ उत्तर प्रदेश में 11 विभागों में ₹10,000 करोड़ से अधिक की बचत हुई है।

तकनीक का लोकतंत्रीकरण

UPI, DigiLocker, DigiYatra जैसे प्लेटफ़ॉर्म आज हर भारतीय की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा हैं। तकनीक अब केवल सुविधाजनक नहीं, बल्कि समावेशी विकास का औजार बन चुकी है।

जलवायु संरक्षण में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका

आज विश्व स्वीकार कर चुका है कि अनियंत्रित विकास टिकाऊ नहीं है। मोदी जी की ‘पंचामृत नीति’ और LiFE (Lifestyle for Environment)जैसे अभियानों ने भारत को पर्यावरणीय संतुलन का वैश्विक प्रेरक बना दिया है।

पिछले दशक में सौर ऊर्जा उत्पादन में 2300% की वृद्धि हुई है और कीमतों में 70-80% की गिरावट। प्रधानमंत्री सूर्यगृह योजना जैसे प्रयासों से भारत नवीकरणीय ऊर्जा की राह पर तीव्रता से आगे बढ़ रहा है।

आर्थिक उन्नति: आत्मनिर्भरता से महाशक्ति तक

COVID-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में आई, पर भारत ने न केवल खुद को संभाला, बल्कि विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा। अब वह दिन दूर नहीं जब भारत तीसरी सबसे बड़ी महाशक्ति बनेगा।

IMF ने भारत को विश्व की सबसे तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था घोषित किया है। निवेश के लिए आज भारत सबसे भरोसेमंद स्थल बन चुका है।

सेमीकॉन हब बनने की ओर भारत की उड़ान

हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए ‘सेमीकॉन इंडिया सम्मेलन’ के माध्यम से भारत ने चिप निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की शुरुआत कर दी है। लाल किले से प्रधानमंत्री ने कहा था—"दुनिया के हर डिवाइस में ‘मेड इन इंडिया चिप’ लगे, यह मेरा सपना है।"

आज यह सपना सिलिकॉन डिप्लोमेसी के ज़रिए साकार होने की ओर है।

नव निर्माण का अमृत काल

ईश्वर की लीला है कि प्रधानमंत्री मोदी का जन्म देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती के दिन हुआ। आज भारत एक भव्य नव निर्माण की राह पर है—एक ऐसा भारत, जो भविष्य की आकांक्षाओं पर वर्तमान की नींव रख रहा है, और इस निर्माण के प्रधान शिल्पी नरेंद्र मोदी हैं।

हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ का सपना जनभागीदारी से साकार होगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा और समर्थन का स्तंभ

🗓️ प्रकाशित: 29 अगस्त 2024 (राष्ट्रीय खेल दिवस)

एक संवेदनशील नेता, जो खिलाड़ियों के साथ खड़ा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल देश के प्रशासनिक प्रमुख ही नहीं, बल्कि हर भारतीय खिलाड़ी के आत्मविश्वास और प्रेरणा के स्रोत भी हैं। चाहे ओलंपिक का मंच हो या कॉमनवेल्थ खेल, चाहे किसी युवा खिलाड़ी की पहली जीत हो या किसी दिग्गज का कठिन समय—प्रधानमंत्री मोदी हर समय खिलाड़ियों के साथ खड़े रहते हैं। उनकी नीतियाँ, संवाद और संवेदना से भरे शब्द खिलाड़ियों को नई ऊर्जा देते हैं।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर तीन प्रतिष्ठित खिलाड़ियों—मनु भाकर, अनुष अगरवाला और सरबजोत सिंह—ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी की निकटता और मार्गदर्शन ने उनके जीवन और खेल करियर में गहरा प्रभाव डाला है।

मनु भाकर: “उन्होंने मुझे बड़ा सपना देखने का हौसला दिया”

ओलंपिक खिलाड़ी और शूटिंग चैंपियन मनु भाकर ने साझा किया कि 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब वे पहली बार प्रधानमंत्री मोदी से मिलीं, तब वे मात्र 16 वर्ष की थीं। इस कम उम्र में भी प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत समर्थन उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक था। मनु ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने मुझसे कहा था—‘तुम बहुत छोटी हो, तुम इससे भी बड़ी सफलता प्राप्त करोगी। ज़रूरत पड़े तो मुझसे संपर्क करना।’ उनके इन शब्दों ने मेरे आत्मविश्वास को बहुत बढ़ाया।”

टोक्यो ओलंपिक में प्रदर्शन से संतुष्ट न होने के बाद भी प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से उनसे बात की, उन्हें ढाढ़स बंधाया और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। “उन्होंने मुझसे कहा कि आत्मविश्वास बनाए रखो, और यह बात जानकर मैं आश्चर्यचकित थी कि वे हर खिलाड़ी की जानकारी व्यक्तिगत रूप से रखते हैं।" मनु ने कहा कि प्रधानमंत्री न केवल अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों से मिलते हैं, बल्कि उनके बाद भी उनसे बात करते हैं और उनके अनुभवों को सुनते हैं।

अनुष अगरवाला: “उनके शब्दों ने हमारा हौसला और विश्वास दोनों बढ़ाया”

भारत के घुड़सवारी (इक्वेस्ट्रियन) ओलंपियन अनुष अगरवाला ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा हर खिलाड़ी को समान मान-सम्मान और प्रोत्साहन दिया है, चाहे वह खेल भारत में लोकप्रिय हो या नहीं। पेरिस ओलंपिक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने हर खिलाड़ी को व्यक्तिगत पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि कोई भी ज़रूरत हो तो बेहिचक बताएं।

अनुष ने कहा, “सिर्फ यह पत्र ही हमारे मनोबल को ऊंचा उठाने के लिए काफी था।” उन्होंने यह भी साझा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ओलंपिक से पहले एक विशेष संवाद में खिलाड़ियों के बीच औपचारिकताओं को तोड़ा और ऐसे सवाल किए जिनसे अनुभवी खिलाड़ी नए खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने लगे। “उन्होंने हमारे बीच आत्मीयता और जोश का ऐसा माहौल बनाया जो हमारे लिए बहुत खास था।”

अनुष ने यह भी कहा कि घुड़सवारी भारत में अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय खेल है, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें उतना ही सम्मान और चिंता दी, जितना किसी अन्य बड़े खिलाड़ी को। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री हर खेल और हर खिलाड़ी के साथ न्यायपूर्ण दृष्टिकोण रखते हैं।

सरबजोत सिंह: “प्रधानमंत्री के शब्दों ने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए”

शूटिंग में कांस्य पदक विजेता सरबजोत सिंह ने कहा कि पेरिस ओलंपिक से पहले प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत ने उनमें एक नई ऊर्जा भर दी थी। “उनकी बातें सुनकर सचमुच रोंगटे खड़े हो गए।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल औपचारिक नहीं था—वह दिल से दिया गया समर्थन था, जिससे वे भारत के लिए पदक जीतने के लिए बेहद प्रेरित हुए।

सरबजोत ने बताया कि पदक जीतने के बाद प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें बधाई दी और अगली ओलंपिक (लॉस एंजेलेस) में बड़ा पदक जीतने की प्रेरणा दी। उन्होंने सरकार की योजनाओं जैसे ‘खेलो इंडिया’ और ‘TOPS स्कीम’ (Target Olympic Podium Scheme) की भी प्रशंसा की, जिनके माध्यम से उन्हें लक्ज़मबर्ग में विशेष प्रशिक्षण की सुविधा मिली। “इन योजनाओं की त्वरित सहायता मेरे प्रशिक्षण और सफलता का आधार बनी,” उन्होंने कहा।

एक ऐसा नेता जो खिलाड़ियों की चिंता करता है

मनु भाकर, अनुष अगरवाला और सरबजोत सिंह की ये तीनों कहानियाँ एक ही बात को उजागर करती हैं—प्रधानमंत्री मोदी केवल मंच पर दिखाई देने वाले नेता नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के सुख-दुख में सहभागी एक संवेदनशील मार्गदर्शक हैं।

वे खिलाड़ियों से संवाद करते हैं, उन्हें समझते हैं, व्यक्तिगत स्तर पर उनका मार्गदर्शन करते हैं और हर खेल—चाहे वह लोकप्रिय हो या नहीं—को समान दृष्टि से देखते हैं।

आज जब भारत राष्ट्रीय खेल दिवस मना रहा है, ये अनुभव हमें यह याद दिलाते हैं कि नरेंद्र मोदी जैसे नेता के नेतृत्व में भारतीय खेल प्रतिभा को वह सम्मान और मंच मिल रहा है जिसकी वह सदियों से हकदार थी। यह विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त मार्गदर्शन में भारत आने वाले वर्षों में खेलों में वैश्विक महाशक्ति बनकर उभरेगा।



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